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कटनी। शक्ति की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्र के अंतर्गत सप्तमी : कटनी। “चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर मां जालपा मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 260 साल पुरानी परंपरा बनी श्रद्धा का केंद्र”

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Wed, Mar 25, 2026


कटनी। शक्ति की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्र के अंतर्गत सप्तमी के दिन शहर के प्रमुख शक्तिपीठ मां जालपा मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।

करीब 260 वर्षों से आस्था का केंद्र बना मां जालपा मंदिर न केवल कटनी बल्कि पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मां जालपा शहर को हर संकट से बचाती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्र के दौरान यहां विशेष सजावट की जाती है, जिससे मंदिर की छटा और भी मनमोहक हो जाती है।

मंदिर के पुजारी लालजी पंडा के अनुसार, जहां आज मंदिर स्थित है, वहां पहले घना बांस का जंगल हुआ करता था। उनके पूर्वजों को मां ने स्वप्न में दर्शन दिए, जिसके बाद माता जालपा उस स्थान पर प्रकट हुईं। सन 1766 में रीवा निवासी बिहारीलाल को मां ने कटनी बुलाया, जिन्होंने यहां आकर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू की और बाद में मंदिर का निर्माण कराया।

मंदिर में मां जालपा के साथ मां काली, मां शारदा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसके अलावा हनुमान जी और भैरव बाबा भी विराजमान हैं। यहां की अखंड ज्योत, जवारे और कलश विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

वर्ष 2012 में मंदिर का विशेष जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें परिसर, गुंबद और प्रवेश द्वार को भव्य रूप दिया गया। इसी दौरान मंदिर परिसर में 64 योगिनियों की स्थापना भी कराई गई। नवरात्र के अलावा वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

वर्तमान में बिहारीलाल पंडा की पांचवीं पीढ़ी के पुजारी लालजी पंडा और उनका परिवार मंदिर में सेवा कार्य कर रहा है। नवरात्र के पावन अवसर पर मां जालपा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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