सरायपाली की ग्राम पंचायत तोरेसिंघा में लाखों का खेल: : बिना टेंडर खरीद ली 9,99,296 रुपये की हाईमास्क लाइट;
फिरोज खान संभाग प्रमुख रायपुर
Sat, Jun 27, 2026
*गायब मिलीं 3 सालों की रोकड़ बहियाँ,*
*जाँच अधिकारी बोले- 'सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दो!*
सरायपाली (महासमुन्द)।
शासन के कड़े नियमों को ठेंगा दिखाते हुए ग्राम पंचायत तोरेसिंघा में नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपयों की सामग्री क्रय करने का एक बड़ा मामला सामने आया है । चौंकाने वाली बात यह है कि जब जनपद पंचायत में लिखित शिकायत के 8 महीने बाद तक कोई जांच एवं कार्यवाही न होने पर इसकी शिकायत फिरोज खान पीएमओ पोर्टल पर की, तो जाँच कर्ता जनपद पंचायत सरायपाली के अधिकारियों ने मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितता मिलने के बावजूद महज़ 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने की हल्की सिफारिश कर मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया है।
तीन साल का रिकॉर्ड गायब, फिर भी जाँच दल मेहरबान!
जाँच प्रतिवेदन में यह ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया गया है कि तोरेसिंघा पंचायत के सचिव माखनलाल चौधरी ने वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 (15वें वित्त मद) की सामान्य रोकड़ बही (Cash Book) और आवश्यक सरकारी अभिलेख जाँच दल के सामने प्रस्तुत ही नहीं किए । पंचायती राज नियमों में वित्तीय रिकॉर्ड छुपाना या गायब करना बेहद गंभीर अपराध और सस्पेंशन का आधार माना जाता है, लेकिन जाँच अधिकारी कमल किशोर नायक और लक्ष्मण कुमार भोई इस पर चुप्पी साध गए ।9,99,296 रुपये की हाईमास्क लाइट और लाखों के बोर खनन में नियमों का उल्लंघन छत्तीसगढ़ पंचायत सामग्री तथा माल क्रय नियम 2013 के अनुसार 10,000 रुपये से अधिक की किसी भी खरीदी के लिए खुली निविदा (Open Tender) बुलाना अनिवार्य है। लेकिन तोरेसिंघा पंचायत में नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन देखने को मिला :9,99,296 रुपये की हाईमास्क लाइट बिना किसी टेंडर के सीधे खरीद ली गई।1,45,000 रुपये और 1,06,940 रुपये के बोर खनन मनमाने तरीके से करा दिए गए 1,41,800 रुपये का मोटर पंप सीधे खरीद लिया गया ।इसके अलावा रंगमंच निर्माण में 2,50,000 रुपये, अहाता निर्माण में 3,68,000 रुपये और 3,50,000 रुपये तथा सीसी रोड निर्माणों में 2,58,524 रुपये और 2,57,953 रुपये का भारी-भरकम व्यय किया गया ।जाँच रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इस पूरी अवधि (2020 से 10 अगस्त 2025 तक) में हुए लाखों के खर्चों के संबंध में पंचायत के पास न तो कोई निविदा सूचना है, न कोटेशन प्राप्त करने का रिकॉर्ड, न निविदा चयन प्रक्रिया के दस्तावेज़ और न ही सामग्री की कोई फोटो उपलब्ध है ।सचिव का अजीब तर्क- 'काम की जल्दबाजी थी, इसलिए नियम नहीं माने'जब नियमों के अभाव पर सचिव माखनलाल चौधरी से जवाब माँगा गया, तो उनका तर्क हास्यास्पद था । उन्होंने बयान दिया कि "कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए माल खरीदी क्रय नियम का पालन का दस्तावेज़ नहीं बनाया गया, बस नजदीकी एवं स्थानीय दुकानों से खरीदकर काम करा दिया" । वर्तमान सरपंच श्रीमती सुनिता कुम्हार ने भी अपने बचाव में बयान दिया कि उनके कार्यकाल में पेयजल एवं स्वच्छता के लिए 50,000 रुपये से कम का व्यय होने के कारण क्रय नियम आवश्यक नहीं है । वहीं पूर्व सरपंच श्री विनय कुमार पटेल (कार्यकाल 2020 से 2025) तो जाँच टीम द्वारा सूचना दिए जाने के बाद भी अनुपस्थित रहे और अपना बयान दर्ज नहीं कराया।
कोविड की आड़ और रस्म अदायगी वाली रिपोर्टजाँच अधिकारियों ने इस गंभीर अनियमितता को सामान्य प्रक्रियात्मक चूक दिखाने के लिए वाणिज्य कर विभाग के कोविड-19 आपदा कालीन छूट का सहारा लिया और वर्ष 2020-21 व 2021-22 में छूट की बात कही । अधिकारियों ने अपने अंतिम अभिमत में जिला पंचायत को सिफारिश की है कि नियमों का पालन न करने के एवज में सरपंच और सचिव को महज़ एक "कारण बताओ नोटिस" थमा दिया जाए ताकि वे 'भविष्य में कड़ाई से पालन' करें ।लाखों रुपये के बिना टेंडर क्रय और 3 साल का वित्तीय रिकॉर्ड (रोकड़ बही) गायब होने के बाद भी ऐसी 'रहमदिल' जाँच रिपोर्ट ने अब खुद जाँच अधिकारियों की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है । शिकायतकर्ता अब इस कमज़ोर रिपोर्ट के खिलाफ जिला कलेक्टर महासमुन्द और संभागायुक्त से उच्च स्तरीय तकनीकी और वित्तीय ऑडिट की मांग करने की तैयारी में हैं
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