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जनाक्रोश,2023 से पहले के वाहन मालिक पूछ रहे सवाल-"हमारी गाड़ियों का क्या होगा?"

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E20 पेट्रोल पर बढ़ता : जनाक्रोश,2023 से पहले के वाहन मालिक पूछ रहे सवाल-"हमारी गाड़ियों का क्या होगा?"

हिमांशु

Wed, Jul 8, 2026

वाहन चालकों में माइलेज,रखरखाव और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर चिंता,सरकार और ऑटो उद्योग E20 को सुरक्षित बता रहे हैं,लेकिन बहस तेज।

Mpneswlive Katni

District Reporter Himanshu

देशभर में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के लाखों मालिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि उनकी गाड़ियां E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं, तो भविष्य में उनकी स्थिति क्या होगी।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया, विभिन्न उपभोक्ता मंचों और कई सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने, वाहन के प्रदर्शन में बदलाव तथा भविष्य में रखरखाव खर्च बढ़ने जैसी आशंकाएं व्यक्त की हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि E10 के अनुरूप बने कुछ पुराने वाहनों में रबर से जुड़े ईंधन तंत्र के पुर्जों पर अधिक एथेनॉल का प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां लगातार यह कह रही हैं कि व्यापक परीक्षणों के आधार पर E20 नीति लागू की गई है और आधुनिक वाहनों के लिए इसे सुरक्षित माना गया है।

इसी बीच आम वाहन मालिकों के बीच एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग पूछ रहे हैं कि यदि 2023 से पहले खरीदे गए लाखों वाहन भविष्य में प्रभावित होते हैं तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों के बीच यह भावना भी सामने आ रही है कि वर्षों की मेहनत की कमाई से खरीदी गई गाड़ियों का मूल्य यदि घटता है या उनके रखरखाव का खर्च बढ़ता है तो इसका समाधान क्या होगा।

सोशल मीडिया पर कई तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। कुछ उपभोक्ता भावनात्मक अंदाज में सवाल उठा रहे हैं—"क्या 2023 से पहले की गाड़ियां अब बेकार हो जाएंगी? क्या इन्हें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी खरीदेंगे? क्या लोग अपनी-अपनी गाड़ियों को आग लगा दें?" यह कथन जनता के एक वर्ग की नाराज़गी और चिंता को दर्शाता है। यह किसी तथ्य या सरकारी प्रस्ताव का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि सार्वजनिक असंतोष की अभिव्यक्ति है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि E20 नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात में कमी लाना, किसानों की आय बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग ने E20 को लेकर उठ रही कई आशंकाओं का खंडन भी किया है तथा कहा है कि इस विषय पर भ्रामक जानकारी से बचना चाहिए।

फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में करोड़ों पुराने वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं, तो सरकार को उनके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, तकनीकी सहायता, आवश्यक होने पर अपग्रेड की व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं की शंकाओं का पारदर्शी समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। केवल नई तकनीक लागू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पुराने वाहन मालिकों का विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

अब देशभर के वाहन मालिकों की निगाहें सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अगले बयान पर टिकी हैं। जनता जानना चाहती है कि वर्ष 2023 से पहले खरीदे गए वाहनों के संबंध में सरकार की दीर्घकालिक नीति क्या है, यदि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा, और क्या ऐसे वाहन मालिकों के लिए कोई विशेष राहत, मार्गदर्शन या सहायता योजना लाई जाएगी।

फिलहाल E20 पेट्रोल पर बहस थमने के बजाय और तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और संभावित नीतिगत निर्णय इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

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