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16 साल बाद मेसर्स के.पी. अवस्थी से ₹7.31 करोड़ वसूली का मामला सुर्खियो : मेसर्स के.पी. अवस्थी ₹7.31 करोड़ वसूली मामला: EOW की जांच में खुला था जाली रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट का खेल'

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Mon, Jul 6, 2026

मेसर्स के.पी. अवस्थी ₹7.31 करोड़ वसूली मामला: EOW की जांच में खुला था जाली रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट का खेल'; 9 में से 7 सर्टिफिकेट मिले थे फर्जी

EOW ने गंभीर धाराओं में दर्ज किया था मुकदमा!

कटनी/जबलपुर:

करीब 16 साल बाद मेसर्स के.पी. अवस्थी से ₹7.31 करोड़ वसूली का मामला सुर्खियों में है। संचालनालय भोपाल से पत्र आने के हडकंप मचा हुआ है। जिले के बहुचर्चित मेसर्स के.पी. अवस्थी के वसूली मामले में जैसे-जैसे परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे इस महा-खेल का वो डरावना चेहरा सामने आ रहा है जिसे दबाने के लिए सालों से 'खेल' किया जा रहा था।

बताया जा रहा है कि EOW के निरीक्षक के.बी. सिंह द्वारा प्रारंभिक जांच और भौतिक सत्यापन की गई थी। जिसके बाद ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ था। जांच में साफ हो गया था कि यह मामला केवल नियत समय पर रॉयल्टी न चुकाने का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सरकारी दस्तावेजों की कूटरचना और शासन के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी का है।

EOW इंस्पेक्टर के.बी. सिंह की जांच में चौंकाने वाला खुलासा

विश्वस्त सूत्रों और EOW की जांच रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षक के.बी. सिंह द्वारा किए गए सत्यापन में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि आरोपी मेसर्स के.पी. अवस्थी (प्रोपराइटर केशव प्रसाद अवस्थी) ने वर्ष 2004 से 2009 के बीच पश्चिम मध्य रेल (WCR) जबलपुर के अंतर्गत जबलपुर और कटनी के कुल 9 विभिन्न कार्यस्थलों (Work Sites) पर गिट्टी (Ballast) सप्लाई करने का ठेका लिया था।

रेलवे से भुगतान उठाने के एवज में ठेकेदार द्वारा विभाग के समक्ष कुल 9 रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (RCC) प्रस्तुत किए गए थे। लेकिन जब इस महा-घालमेल की भनक लगी और खनिज विभाग कटनी से इन सभी 9 प्रमाण पत्रों का आधिकारिक सत्यापन कराया गया, तो विभाग के भी होश उड़ गए। जांच में 9 में से केवल 2 सर्टिफिकेट ही सही पाए गए, जबकि शेष 7 रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित पाए गए।

2.90 लाख घनमीटर गिट्टी की अवैध निकासी और लाखों की सीधी चपत

EOW और खनिज विभाग की संयुक्त पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि जिन 7 फर्जी सर्टिफिकेटों के आधार पर रेलवे से करोड़ों का भुगतान लिया गया, उनके एवज में खनिज विभाग कटनी द्वारा कभी कोई रॉयल्टी जारी ही नहीं की गई थी।

* अवैध उत्खनन का पैमाना: आरोपी के.पी. अवस्थी ने बिना किसी वैध पास के लगभग 2,90,011.168 घनमीटर गिट्टी की अवैध निकासी कर डाली।

* राजस्व को चपत: तत्कालीन ₹28 प्रति घनमीटर की शासकीय दर से गणना की जाए, तो ठेकेदार ने शासन को सीधे तौर पर ₹81,20,312.70 (इक्यासी लाख बीस हजार तीन सौ बारह रुपये) की शुद्ध आर्थिक क्षति पहुंचाई।

नोट: इसी ₹81.20 लाख की मूल चोरी पर ही नियमों के तहत खनिज विभाग द्वारा 10 गुना पेनाल्टी का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया था, जो आज बढ़कर ₹7.31 करोड़ से अधिक की महा-वसूली के रूप में तब्दील हो चुका है।

धोखाधड़ी और जालसाजी की इन गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा

फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन की आंखों में धूल झोंकने और राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप जांच में स्पष्ट होने के बाद EOW ने आरोपी मेसर्स के.पी. अवस्थी के खिलाफ कानून का शिकंजा उसी वक्त कसा। आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 17/09 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) और खनिज अधिनियम की इन गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया, जिसमें:

* IPC की धारा 420: शासन और रेलवे के साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी।

* IPC की धारा 467: मूल्यवान सुरक्षा (सरकारी दस्तावेज) की कूटरचना और जालसाजी।

* IPC की धारा 468: धोखाधड़ी के स्पष्ट उद्देश्य से जाली दस्तावेज तैयार करना।

* IPC की धारा 471: जानते हुए भी फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना।

कानूनी एक्ट: इसके साथ ही 'खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957' की धारा 21 और 'मप्र गौण खनिज नियम 1966' के नियम 53 के अंतर्गत गंभीर मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया था।

अंजाम की ओर बढ़ रहा है 16 साल पुराना मामला

ईओडब्ल्यू की इस एफआईआर और जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि आरोपी ने कानून की हर चौखट को लांघने का प्रयास किया। तत्कालीन अफसरों का संरक्षण लेकर और बाद में हाई कोर्ट में वर्ष 2024 तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद इस जालसाजी पर अदालत से कोई राहत नहीं मिली।

यही कारण है कि वर्तमान में खनिज विभाग भोपाल की टीम सक्रिय है और वसूली की प्रक्रिया शुरु हुई है।

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