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महासमुंद : पिथौरा-प्रशासन के दबाव के बावजूद 8वें दिन भी डटे प्रबंधक “डर नहीं, हक चाहिए”–सन्नी साहू

फिरोज खान संभाग प्रमुख रायपुर

Thu, Apr 30, 2026

“डर नहीं, हक चाहिए”–सन्नी साहू

दंतेवाड़ा/रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज 8वें दिन में प्रवेश कर गई है। प्रदेश के 902 प्रबंधक प्रशासनिक दबाव और लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद पूरी मजबूती के साथ अपने आंदोलन पर डटे हुए हैं। 38 वर्षों से लंबित मांगों की अनदेखी के खिलाफ अब यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है और प्रबंधकों ने साफ कर दिया है कि अब पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।

तेंदूपत्ता व्यवस्था पर असर, लाखों परिवार प्रभावित

हड़ताल का सीधा असर प्रदेश की तेंदूपत्ता व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। लगभग 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार एवं 65 लाख से अधिक संग्राहकों की आजीविका प्रभावित होने की स्थिति बन रही है, जिससे सरकार और प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रशासनिक दबाव और लेटर से हड़ताल तोड़ने की कोशिश

शासन एवं प्रशासन द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य को “आवश्यक सेवा” बताते हुए विभिन्न प्रकार के पत्र जारी कर हड़ताल को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तर पर भी प्रबंधकों को नोटिस, निर्देश एवं कार्यवाही की चेतावनी देकर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वे हड़ताल से पीछे हट जाएं।

समर्थन से मजबूत हुआ आंदोलन

इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ प्रदेश वन कर्मचारी संघ एवं फड़ मुंशी संघ का लिखित समर्थन प्राप्त हो चुका है, जिससे प्रबंधकों का हौसला और बढ़ा है तथा आंदोलन और अधिक मजबूत हुआ है।

प्रदेश अध्यक्ष का स्पष्ट संदेश

प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कड़े शब्दों में कहा कि “38 वर्षों से प्रबंधकों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। अब हम किसी भी दबाव या धमकी से डरने वाले नहीं हैं। या तो हमें हमारा हक मिलेगा, या हमें इस व्यवस्था से हटा दिया जाएगा, लेकिन अब पीछे हटना संभव नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि बार-बार ज्ञापन, आश्वासन और बैठकों के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे प्रबंधकों में भारी आक्रोश है और अब यह आंदोलन आर-पार की लड़ाई बन चुका है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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