कथा स्थल पर बरस रही है गुरु कृपा, दिव्यता से भावविभोर हुआ हन्तला : बाल संत महाराज के पश्चात बल्लभ शरण जी का पावन आगमन, शिव महापुराण बना आस्था का महाकुंभ
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Sat, Apr 18, 2026
*कथा स्थल पर बरस रही है गुरु कृपा, दिव्यता से भावविभोर हुआ हन्तला*
*बाल संत महाराज के पश्चात बल्लभ शरण जी का पावन आगमन, शिव महापुराण बना आस्था का महाकुंभ*

विजयराघवगढ़ हन्तला की पावन धरती इन दिनों भक्ति श्रद्धा और दिव्यता से सराबोर है। जहां आयोजित दिव्य शिव महापुराण कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था का जीवंत उत्सव बन गई है। कथा स्थल पर पड़ रहे महान संतों के चरणों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया है।कथा व्यास महंत स्वामी सीताराम शरण जू महाराज (लोडा पहाड़) के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही शिव महापुराण की अमृतधारा श्रद्धालुओं के हृदय को छू रही है। संगीतमय शैली में प्रस्तुत यह कथा हर श्रोता को भक्ति के रस में डुबो रही है। इस आयोजन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह आयोजन प्रमुख श्रोता तरुण उपाध्या द्वारा अपने पुत्र राघव के जन्मदिवस के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ कराया जा रहा है।कथा के दौरान जब बाल संत महाराज लोडा वाले महाराज के पावन चरण पड़े तो वातावरण पहले ही दिव्यता से भर उठा था। इसके पश्चात मैहर बड़े अखाड़ा से पधारे बल्लभ शरण जी के आगमन ने इस आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया। श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत कर अपनी आस्था प्रकट की।अपने ओजस्वी उद्बोधन में बल्लभ शरण जी ने कहा मनुष्य को भगवान के श्रीचरणों की प्राप्ति तभी होती है जब उस पर गुरु की कृपा होती है। गुरु ही जीवन को सच्चाई के मार्ग पर चलाना सिखाते हैं।उन्होंने आगे कहा कि शिव महापुराण स्वयं में दिव्य स्वरूप है जिसका श्रवण करने वाला न केवल अपने जीवन के कष्टों से मुक्त होता है बल्कि इसका पुण्य कई पीढ़ियों तक फल देता है। उन्होंने उपाध्या परिवार की इस पहल को सराहते हुए ईश्वर की निरंतर कृपा की कामना की।10 दिवसीय इस भव्य आयोजन में विनोद उपाध्या ललित उपाध्या रामनिवास उपाध्या जय भोले मिश्रा श्रीनिवास रामखेलावन मयंक आदित्य श्रवण सूर्यांश कुंज बिहारी सिद्धि तन्वी मानवी राघव सहित अनेक श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।पूरे आयोजन की भव्यता अपने आप में अद्वितीय है। विशाल पंडाल सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था आकर्षक स्वागत द्वार जगह-जगह जलपान की सुविधा और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था इस आयोजन को ऐतिहासिक बना रही है। दूर-दूर से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका है।आयोजक तरुण उपाध्या का व्यक्तित्व भी इस आयोजन में झलकता है। धार्मिक प्रवृत्ति सेवा भाव और समाज को साथ लेकर चलने का उनका संकल्प ही इस भव्य आयोजन की प्रेरणा है। पूर्व में भी उनके द्वारा कराए गए मंदिर निर्माण और धार्मिक आयोजन आज भी लोगों के हृदय में जीवित हैं। यह शिव महापुराण केवल कथा नहीं बल्कि श्रद्धा संस्कार और सनातन परंपरा का ऐसा संगम बन गया है। जहां हर क्षण भक्त अपने जीवन को धन्य महसूस कर रहा है।


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