टर्की को भारत के खिलाफ बोलना पड़ा मेंहगा, संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी राजनयिक जीत

टर्की को भारत के खिलाफ बोलना पड़ा मेंहगा, संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी राजनयिक जीत

भारत का प्रभाव पूरी दुनिया मे बढ़ रहा है साथ ही भारत को भविष्य की महाशक्ति के रूप में देखा जा रहा है।ऐसे में कोई भी देश India से दुश्मनी व भारत के साथ अपने संबंध खराब नही करना चाहता,यहाँ तक कि चीन भी भारत से सीधे तौर पे दुश्मनी नही कर सकता। इसलिए चीन कभी भी भारत के खिलाफ खुल के नही बोलता।लेकिन अपने पड़ोसी पाकिस्तान और उसके नए सदाबहार दोस्त टर्की के बारे में क्या कहें,ये दोनों देश आये दिन भारत के खिलाफ बोल कर दुनिया मे अपनी ही फज़ीहत कराते रहते हैं।

क्या हुआ टर्की और भारत के बीच?
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता हर वर्ष एक नए देश को मिलती है और इस वक्त संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता टर्की के पास है अब पाकिस्तान को India को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने का व कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है।इसलिए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोज़किर जो कि टर्की से है उनको अपने देश में भारत के खिलाफ बोलने के लिए बुलाया।
पाकिस्तान ने वोल्कन बोज़किर को और खुश करने के लिए अपना देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान हिलाल ए पाकिस्तान से सम्मानित कर दिया।बस फिर क्या था टर्की के वोल्कन बोज़किर गद गद हो गए और जो पाकिस्तान ने कहा वो बोलते चले गए।उन्होंने अपनी पद की गरिमा का ध्यान न रखते हुए भारत के खिलाफ और कश्मीर को लेके कई आपत्तिजनक टिप्पड़ी करी।इसी को लेके India ने कड़ी आपत्ति जताई व वोल्कन बोज़किर को पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा की आप इतने बड़े व सम्मानजनक पद के लायक नही हैं।

कैसे संयुक्त राष्ट्र में हुई भारत की जीत?

दरअसल टर्की के वोल्कन बोज़किर का कार्यकाल कुछ ही समय मे समाप्त होने वाला है और अगले अध्यक्ष के लिए चुनाव होने थे जिसमें भारत के मित्र देश मालदीव ने ये चुनाव जीत लिया।बताते चलें कि India ने पहले ही कह दिया था कि हम मालदीव को संयुक्त राष्ट में पूरा समर्थन देंगे और मालदीव की इस बड़ी जीत में India के एहम किरदार है।
मालदीव के विदेश मंत्री अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष होंगे।उन्हें 193 में से 143 वोट मिले जबकि अफ़ग़ानिस्तान को 48 वोट मिले।

यह मालदीव के लिए बहुत बड़ी जीत है क्योंकि मालदीव पहली बार इस पद के लिए चुना गया है।यह भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमेटिक यानी राजनयिक जीत है क्योंकि मालदीव India एक भरोसेमंद मित्र देश है तथा मालदीव पहली भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर India का आंतरिक मामला है और इसको लेके मालदीव ने कई बार पाकिस्तान को लताड़ भी लगाई है।

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