चीन ने भारतीय सीमा के करीब चलाई बुलेट ट्रेन,भारतीय सीमा से सटे तिब्बत की पहली बुलेट ट्रेन होगी ये

चीन ने भारतीय सीमा के करीब चलाई बुलेट ट्रेन,भारतीय सीमा से सटे तिब्बत की पहली बुलेट ट्रेन होगी ये

चीन और भारत के बीच सीमा पर पिछले एक साल से विवाद चल रहा है और चीन इस विवाद को खत्म करने का नाम नही ले रहा।चीन आये दिन भारतीय सीमा के नज़दीक कुछ न कुछ ऐसा करता रहता है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की बजाय बढ़ जाता है।अभी हाल ही में चीन ने भारतीय सीमा से सटे तिब्बत(Tibet) प्रान्त में पहली बुलेट ट्रेन(Bullet Train) सेवा शुरू की है।यह रेलवे लाइन भारतीय सीमा से काफी करीब है और चीन इससे यही संदेश देना चाहता है कि चीन अवैध रूप से कब्जाए गए तिब्बत में व भारतीय सीमा के करीब क्षेत्रों का विकास जारी रखेगा।

चीन और भारत के बीच सीमा पे विवाद का मुख्य कारण सीमा पे विकास कार्य ही था।दरअसल चीन भारत से सटे सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्य जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर व सड़क निर्माण पर जोर शोर से काम कर रहा था लेकिन जैसे ही भारत ने अपने सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे, सड़क व पुल निर्माण पर काम शुरू किया तो चीन ने इसका विरोध किया और जब भारत नही रुक तो उसने घुसपैठ करके लद्दाख सीमा पर विवाद खड़ा कर दिया।चीन की ये बुलेट ट्रेन परियोजना भी चीन की इसी नीति का हिस्सा है।

लेकिन भारत भी अपने सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्य नही रोकने वाला और भारत भी बहुत तेजी से अपने सीमावर्ती इलाकों में सड़क,पुल,सुरंग,रेल लाइन आदि जैसे जरूरी विकास कार्य तेजी से कर रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के करीब है चीन की यह परियोजना

चीन ने यह बुलेट ट्रेन की परियोजना लहासा और नियंगची के बीच शुरू की गई है।बताते चलें कि नियंगची भारत के अरुणाचल प्रदेश से सटा हुआ नगर है।चीन शुरू से ही अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता आया है और चीन कभी ये बात नही मानता कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है।आये दिन अरुणाचल ओरदेश से चीन की घुसपैठ व अवैध निर्माण की घटनाएं सामने आती रहती हैं।भारत भी दुनिया को स्पष्ट रूप से बता चुका है कि अरुणाचल प्रदेश तो क्या तिब्बत भी चीन का हिस्सा नही है।अरुणाचल प्रदेश भारत के अभिन्न हिस्सा था,है और रहेगा।

मिलेगी स्ट्रेटेजिक बढ़त व कनेक्टिविटी होगी मजबूत

चीन के इस बुलेट ट्रेन परियोजना से चीन को स्ट्रेटेजिक(strategic) बढ़त मिलेगी।जवानों के क्विक मूवमेंट(quick movement) के लिए यह एक मील ला पत्थर साबित होगी।आपको बता दें कि की तिब्बत में यह चीन की दूसरी रेल परियोजना है।चीन का मानना है को रेल चीन की पकड़ को सीमा पर मजबूत करेगा और एक बेहतर और क्विक कनेक्टिविटी(quick connectivity) प्रदान करेगा।

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